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भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह के खिलाफ एसआईटी जांच पर हाईकोर्ट की रोक

रायपुर (एजेंसी) | हाईकोर्ट से पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह को राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश पर रोक लगा दी है। अमन सिंह द्वारा बिना किसी एफआईआर के एसआईटी गठन को नियम विरुद्ध बताते हुए, जांच पर रोक लगाने की याचिका लगाई थी।

जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच में मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। अमन सिंह ने याचिका में कहा था कि जिस मामले में सरकार ने पहले ही उन्हें एनओसी दे दी, उसकी फिर जांच का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए जांच निरस्त की जाए। दरअसल, दिल्ली की विजया मिश्रा ने अमन सिंह के खिलाफ पीएमओ में शिकायत की थी।




इसमें कहा गया था आरईएस से वीआरएस लेने के बाद अमन सिंह को छत्तीसगढ़ में संविदा नियुक्ति दी गई। इस दौरान उन्होंने पूर्व में खुद प दर्ज प्रकरण की जानकारी छिपाई। जबकि 2001-02 में बैंगलुरू में पोस्टिंग के दौरान उन पर भ्रष्टाचार मामले की जांच की हुई, चार्जशीट भी पेश हुई थी। पीएमओ ने विजया की शिकायत छत्तीसगढ़ सरकार को भेजी।

जिसके बाद प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव रीता शांडिल्य ने ईओडब्ल्यू के महानिदेशक को पीएमओ से मिली शिकायत का हवाला देते हुए अमन सिंह के खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश दिए थे।

सिंह की तरफ से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता किशोर भादुड़ी ने तर्क प्रस्तुत किया कि एफआईआर दर्ज किए बगैर एसआईटी जांच शुरू नहीं की जा सकती। इधर, अधिवक्ता विकास सिंह ने रायपुर में मीडिया को बताया कि हमने अपनी याचिका में कहा कि बिना एफआईआर के एसआईटी का गठन अवैधानिक है। कोई अपराध हुआ है या नहीं सिर्फ यह पता लगाने के लिए एसआईटी गठन किया गया, जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट जहां एफआईआर होगी, वहीं इन्वेस्टिगेशन हो सकती है। पीएमओ की भूमिका मामले में सिर्फ पोस्ट ऑफिस की रही है।



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