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10 साल में दोगुना हो गई पेट्रोल डीज़ल की कीमत, एक्साइज ड्यूटी 217 प्रतिशत बढ़ी

रायपुर (एजेंसी) | हमारे देश में पिछले करीब 10 सालों में पेट्रोल की कीमत 45 से बढ़कर 81 रुपए पहुंच गई। और वही डीजल डेढ़ सौ फीसदी महंगा होकर 34 रुपए से बढ़कर सीधा 78 रुपए पहुंच गया। ट्रक का भाड़ा और ट्रांसपोर्टेशन  भी करीब ढाई गुना तक बढ़ा है। इसी बढ़ोतरी के चलते रोजमर्रा की जरूरत का सामान जैसे सब्जी, दाल, चावल, नमक, आलू-प्याज इत्यादि जैसी चीजों के दाम 10-10 गुना तक बढ़ गए हैं।

धन का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चावल की आवक स्थानीय है लेकिन ब्रांडेड और खुशबूदार चावल दूसरे राज्यों से आता है। दुबराज, जवांफूल, बासमती और इसी तरह की अन्य ब्रांडेड चावल की कीमत 2008 में 1500 से 2000 रुपए क्विंटल थी। अब इनकी कीमतें 5500 से छह हजार रुपए क्विंटल पहुंच गई है। ब्रांडेड और खुशबूदार चावल छत्तीसगढ़ में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश से आता है। आंध्र से रायपुर का ट्रक का भाड़ा जो 2008 में 25 से 30 हजार रुपए था वह अब 60 से 65 हजार तक पहुंच गया है। भाड़ा बढ़ने की वजह से यहां के थोक कारोबारी भाड़ा और अपना मुनाफा निकालकर चिल्हर कारोबारियों को देते हैं और इसी तरह रीटेलर अपना लोकल भाड़ा व मुनाफा निकालकर चिल्हर का रेट तय करते हैं। इसी कारण से एक दशक में चावल तीन गुना तक महंगा हुआ है। अरहर की दाल 20 से 25 रुपए किलो तक बिकती थी वह भाड़े में वृद्धि की वजह से 65 से 75 रुपए तक महंगी हो चुकी है।




छत्तीसगढ़ में ठंड को छोड़कर शेष मौसम में सब्जियां बेंगलुरु से आती हैं, खासकर टमाटर। वहां टमाटर की कीमत इतनी ज्यादा नहीं होती। लेकिन भाड़ा इतना ज्यादा हो गया है कि भाड़ा निकालकर थोक में कीमत लागने पर वह महंगा हो जाता है। थोक में सब्जी एक रुपए महंगा हुआ तो चिल्हर वाले सीधा आठ से दस रुपए तक कीमत बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि एक दशक पहले तक राजधानी में टमाटर दो से तीन रुपए किलो में बिकता था। बहुत सस्ता भी हो तो यह 10 रुपए किलो से नीचे नहीं पहुंचा है। आलू-प्याज की कीमतें दोगुनी हो गईं। 2008 में आलू की कीमत अधिकतम 600 से 700 रुपए क्विंटल था, जो 2018 में बढ़कर 1500 रुपए क्विंटल पहुंच गया है। चिल्हर में उस समय आलू आठ से दस रुपए किलो था। अभी 25 से 30 रुपए किलो बिक रहा है। इसी तरह प्याज भी 300 से 400 रुपए क्विंटल था। यह अब बढ़कर 1200 रुपए क्विंटल पहुंच गया है।

कैसे तय होती हैं कीमतें

कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल-डीजल तैयार किया जाता है। इसलिए इनकी कीमत में कच्चे तेल के भाव की सबसे बड़ी भूमिका होती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत डॉलर में तय होने की वजह से रुपए का मूल्य भी इसकी कीमत को प्रभावित करता है। रुपया कमजोर होने की वजह से भी इसकी कीमत बढ़ती है। क्रूड ऑइल और डॉलर की कीमत के बढ़ने-चढ़ने से ही इसकी कीमत तय होती है। क्रूड ऑइल आने के बाद इसकी रिफाइनिंग की जाती है। अभी एक लीटर पेट्रोल की रिफाइनिंग पर 4.75 और डीजल पर 7.5 रुपये की लागत आती है।

10 साल में दोगुना हो गई कीमत, एक्साइज ड्यूटी 217 प्रतिशत बढ़ी

2008 में पेट्रोल की कीमत 45 और डीजल 35 रुपए था। अभी इसकी कीमत दोगुनी हो गई है। पेट्रोल 81.10 और डीजल 78.62 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। एक्साइज ड्यूटी में भी जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। 2014 के मुकाबले पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी में 211.7 और डीजल में 433 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल पर 2014 में एक्साइज ड्यूटी 9.2 रुपये प्रति लीटर थर जो अब बढ़कर 19.48 रुपये हो गयी है। 2014 में डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये लीटर थी जो अब बढ़कर 15.33 रुपए प्रति लीटर हो गई है।



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