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नान घोटाला: गैरकानूनी फोन टैपिंग में डीजी मुकेश गुप्ता, एसपी रजनेश पर एफआईआर

रायपुर (एजेंसी) | नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले की जांच के दौरान आरोपियों और संबंधित दर्जनों लोगों के फोन टैप करने के मामले में डीजी मुकेश गुप्ता और नारायणपुर एसपी रजनेश सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फोन टैपिंग में एफआईआर का यह प्रदेश में पहला मामला है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दोनों अफसरों पर साजिश, फर्जी दस्तावेज बनाने समेत आधा दर्जन अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया है। एफआईआर होने के कुछ घंटे के भीतर इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब इन दोनों अफसरों के खिलाफ बयान देने वाले डीएसपी आरके दुबे ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर आरोप लगाया कि एसीबी के आईजी एसआरपी कल्लूरी और एसपी कल्याण ऐलेसेला ने दबाव डालकर झूठा बयान दिलवाया है।

डीएसपी ने कोर्ट में खुद और परिजनों पर जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी। हालांकि कोर्ट ने आवेदन को निराकृत करते हुए दुबे को यह कहा कि जांच में सहयोग करें। मुकेश गुप्ता राज्य के ताकतवर आईपीएस माने जाते रहे हैं। पिछले पांच साल के दौरान वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे , इसलिए रमन सरकार के विश्वस्त माने जाते रहे। एक समय में वे राज्य के खुफिया चीफ होने के साथ-साथ एसीबी-ईओडब्लू के एडीजी भी थे। इसी दौरान नान पर छापा मारा गया था। ताजा केस इस छापे के दौरान दर्जनों लोगों के फोन की गैरकानूनी टैपिंग से जुड़ा हुआ है। सरकार बदलने के बाद नान मामले की नए सिरे से जांच शुरू हुई, तब टैपिंग से जुड़े दस्तावेज अफसरों के हाथ लगे। दो दिन पहले आईजी कल्लूरी और एसपी एेलेसेला ने गुप्ता के विश्वस्त माने जाने वाले इंस्पेक्टर आरके दुबे का बयान लिया था। इस आधार पर ही मुकेश गुप्ता और रजनेश के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

अवैध टैपिंग का ऐसे खुला राज

डीएसपी आरके दुबे की एसीबी में पोस्टिंग 5 दिसंबर 2014 को हुई थी। उन्होंने नान के अफसरों की फोन टेपिंग की अनुमति से संबंधित कागजों पर दस्तखत किए हैं। लेकिन ये दस्तखत 4 दिसंबर के हैं। चूंकि किसी भी प्रकरण में शक होने पर इंटेलिजेंस के अफसर लगातार 7 दिन तक किसी का फोन सुन सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा के लिए गृह विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। नान के अफसरों का फोन सुनने से संबंधित दस्तावेजों में दुबे के हस्ताक्षर उनकी पोस्टिंग से पहले के हैं। इसलिए माना जा रहा है कि अफसरों ने बैक डेट में फोन सुनने से संबंधित दस्तावेज तैयार किए हैं। चूंकि उस समय मुकेश गुप्ता एसीबी-ईओडब्लू के प्रभार में थे, इसलिए उन्हें भी आरोपी बनाया गया है।

क्या है शपथपत्र में

शपथ पत्र अठारह बिंदुओं का है। उसमें दुबे ने कहा – आईजी कल्लुरी, एसपी इंदिरा कल्याण एलिसेला, एन एन चतुर्वेदी, वकील त्यागी, संजय देवस्थले, नवनीत पाटिल की मौजूदगी में मुझे बुलाया गया। वकील त्यागी ने रजिस्टर दिखाकर मुझसे पूछा कि एंट्री किसकी है। मैंने कहा ये मेरी एंट्री है, पर देखा कि उसमें सफेदा लगा हुआ था। यह मैंने उस रजिस्टर में पहली बार देखा, जिससे यह प्रतीत हो रहा था कि एंट्री बैक डेट से की गई। क्योंकि सफेदा किसने लगाया कब लगाया मुझे जानकारी नहीं है। अफसरों ने मेरा मोबाइल बंद करवा दिया और कहा कि जैसा कह रहे हैं वैसा लिख कर दो वर्ना तुम्हारे खिलाफ एफआईआर होगी। अगर ऐसा लिखकर दोगे तो बचा लेंगे। मुझे घेरकर दबावपूर्वक भयाक्रांत कर बयान लिखवाया गया। मैंने मना किया, तब धमकाया गया। रात साढ़े दस बजे से 6 घंटे रोके रखने के बाद छोड़ा गया। शपथ पत्र के कॉलम क्रमांक-15 में दर्ज है कि सभी इंटरसेप्शन की अनुमति विधिअनुरुप संबंधित कार्यालय से प्राप्त की गई है, जिसके संबंधित दस्तावेज संबंधित कार्यालय में उपलब्ध होंगे।

मैंने कुछ गलत नहीं किया

फोन टैपिंग मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी मुख्य सचिव, गृह सचिव और विधि सचिव की कमेटी ने हर दो माह में इसे जांचा और हमेशा सही पाया है। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। -मुकेश गुप्ता, डीजी छत्तीसगढ़

हाई वाेल्टेज घटनाक्रम

6 फरवरी- एसीबी में बयान देकर डीएसपी दुबे ने बताया कि नान की एफआईआर में आरोपी के कॉलम में दर्ज कूटरचना मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह ने धमकी देकर करवाई।
7 फरवरी- एसीबी ने तत्कालीन एडीजी मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश सिंह पर केस दर्ज किया।
7 फरवरी- डीएसपी दुबे ने लीना चंद्राकर की कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा उससे एसीबी के अफसरों ने धमकाकर बयान लिया है।
8 फरवरी- दुबे हाईकोर्ट गए। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें सुरक्षा देने से मना किया।

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CM Bhupesh Bhagel Mandi ko Maar

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