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प्रधानमंत्री ने जिस दंतेश्वरी योजना को सराहा था, थम गए उसके पहिए, बेरोजगार हुईं महिलाएं

दंतेवाड़ा (एजेंसी) | गीदम में बेरोजगार महिलाओं को रोजगार देने के लिए महिलाओं को बांटे गए ई-रिक्शा अब कबाड़ के ढेर में पड़े हैं। इन ई-रिक्शा में बैटरी खराब होने पर महिलाओं ने इसे लाइवलीहुड कॉलेज में अधिकारियों को सौंप दिया था। अब अधिकारी बैटरी लगवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। ऐसे में ये कई महीनों से कॉलेज परिसर में रखे-रखे जंग खा रहे हैं। इधर ई-रिक्शा नहीं होने से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए वापस रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

बेरोजगार महिलाओ को रोजगार देने के लिए जिला प्रशासन ने दंतेश्वरी सेवा योजना के तहत ई-ऑटो रिक्शा को शहर की सड़कों पर उतारा था।

अक्टूबर 2017 को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों स्वसहायता समूह की महिलाओं को ई-रिक्शा दिया गया। इन महिलाओं को लाइवलीहुड कॉलेज में ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया।




ई-रिक्शा लेने के लिए समूह की महिलाओ ने  20 प्रतिशत राशि दी थी और शेष 80 प्रतिशत राशि डीएमएफ मद से जिला प्रशासन ने दी। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने रोजगार पाने के लिए ई-रिक्शा को अलग अलग इलाको में चलाना शुरू किया।  शुरुआती दिनों में इससे अच्छी आमदनी भी हुई, लेकिन धीरे-धीरे ई-रिक्शा ने दम तोड़ना शुरू कर दिया। इसमें बैटरी संबंधित कई तकनीकी खामियां आनी शुरू हो गयीं।

करीब 6 महीने से बेरोजगार हैं ये महिलाएं

तकनीकी खराबी के चलते लगभग 50 से अधिक ई-रिक्शा लाइवलीहुड कॉलेज के पुराण परिसर में खड़ी हैं। स्वायं सहायता समूह की सदस्य कुंबति पोयम ने बताया कि उसके ई-रिक्शा की बैटरी खराब होने की वजह से पिछले 5 से 6 महीनों से लाइवलीहुड कॉलेज के पुराने परिसर में ही खड़ी है। लाइवलीहुड काॅलेज के ई-रिक्शा काॅर्डिनेटर प्रवीण कुमार ने बताया कि ई-रिक्शा में केवल बैटरी की समस्या आ रही है। बैटरी मंगाई गई है। इस काम में करीब 10 से 15 दिनों का समय अभी और लगेगा।

कई बड़ी हस्तियां कर चुकी हैं ई-रिक्शा की सवारी

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर देश की कई बड़ी हस्ती ई-रिक्शा की सवारी कर चुके हैं। दंतेवाड़ा जैसे नक्सली इलाके में ई-रिक्शा चलाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनता देख राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने सराहना की थी।



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