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ई-टेंडर घोटाला: 4601 करोड़ के घोटाले में पहली कार्रवाई, चिप्स सीईओ, पीडब्लूडी दफ्तर में छापा, 1921 टेंडर फाइल जब्त 

रायपुर (एजेंसी) | चिप्स सीईओ और पीडब्लूडी दफ्तर में गुरुवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लू) ने छापे मारे। इस दौरान 1921 टेंडरों की फाइलें जब्त की गईं। दरअसल, कैग ने अपनी रिपोर्ट में साल 2016-17 में ई-टेंडरिंग में 4.5 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा किया था। इसके बाद सरकार ने ईओडब्लू को जांच का जिम्मा सौंपा।

ईओडब्लू ने जांच शुरू कर गुरुवार को मामले में पहली दबिश दी। ज्यादातर फाइलें दोनों ऑफिस के दफ्तर में ही मिल गईं। दफ्तर के कंप्यूटर भी चेक हुए, कुछ हार्ड डिस्क जमा की गई हैं। चिप्स दफ्तर में सीईओ की मौजूदगी में फाइल जब्त हुईं। छापा मारने ईओडब्लू एसपी कल्याण एलेसेला खुद पहुंचे।




ईओडब्लू ने कैग रिपोर्ट के बाद घोटाले के 2 केस दर्ज किए हैं। चिप्स सभी विभागों में हुए टेंडर की नोडल एजेंसी के तौर पर काम करती है। इसलिए दोपहर करीब 1 बजे ईओडब्लू की टीम सबसे पहले चिप्स दफ्तर पहुंची, उसके बाद पीडब्ल्यूडी दफ्तर। वहां देर शाम तक जांच होती रही।

कैग रिपोर्ट से हुआ थे भ्रष्टाचार का खुलासा 

  • कैग रिपोर्ट में 17 सरकारी विभागों के अधिकारियों द्वारा 2016-17 में 4601 करोड़ के टेंडर निकाले गए।
  • 74 सरकारी कंप्यूटरों से निविदा अपलोड हुईं। लेकिन जिन कंप्यूटरों से टेंडर जारी हुए, उन्हीं से भरे गए। ऐसा 1921 टेंडर के लिए हुआ। इस तरह 4601 करोड़ के टेंडर अधिकारियों के कंप्यूटर से भरे गए।
  • 10 लाख से 20 लाख तक के 108 करोड़ रुपए के टेंडर तो ऑनलाइन जारी ही नहीं किए गए।
  •  रिपोर्ट में कहा गया है कि चिप्स ने ई-टेंडर को सुरक्षित बनाने पर्याप्त उपाय नहीं किए।
  • 79 ठेकेदारों ने 2 पैन नंबर टेंडर प्रक्रिया में इस्तेमाल किए।
  • नवंबर 2015 से मार्च 2017 के बीच 235 ई-मेल आईडी का इस्तेमाल 1459 टेंडर भरने वालों ने किया।
  • एक ई-मेल आईडी का इस्तेमाल 309 ठेकेदारों ने किया।

फाइलों के परीक्षण के बाद आगे कार्रवाई करेंगे 

जब्त फाइलों के हजारों पन्ने हैं। उनके परीक्षण के बाद आगे कार्रवाई होगी। ये प्रारंभिक कार्रवाई हुई है।” -कल्याण एलेसेला, एसपी, ईओडब्लू



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