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भिलाई स्टील प्लांट में लगी भीषण आग, 4 घंटे की मशक्कत से भी नहीं बुझ पाई, करोड़ों का नुकसान, यूनियनों ने प्रबंधन को बताया जिम्मेदार

भिलाई (एजेंसी) | भिलाई स्टील प्लांट में लगातार दूसरे दिन आग लग गई। शुक्रवार सुबह आठ बजे टार प्लांट में लगी आग ने देखते-देखते इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि वहां गोदाम में रखा करोड़ों का सामान जलकर खाक हो गया। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। अभी भी आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है।

बीएसपी के टार प्लांट में ज्वलनशील नेप्थलॉन गैस का बड़ा स्टोरेज है। इसके साथ वहां गोदाम में करोड़ों का सामान पड़ा था। सुबह आठ बजे अचानक आग लग गई और देखते-देखते 500 वर्गमीटर में प्लांट में आग फैल गई। टार प्लांट के आस-पास बने कई प्लांट भी इसकी चपेट में आने वाले थे, ले न समय रहते फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर नियंत्रण पा लिया पर अभी भी पूरी तरह से आग बुझ नहीं पाई है।

लैडल फर्नेस-2 फटने से बहा हॉट मेटल, समय रहते भाग निकले कर्मचारी

गुरुवार सुबह करीब साढ़े 11 एसएमएस-3 के लैडल फर्नेस नंबर 2 जिसे एलएफ-2 क्रेक होने के बाद फट गया। जिससे लैडल में भरा हॉट मेटल नीचे बहने लगा। नीचे पानी होने की वजह से हाट मेटल से आग की 30 फीट तक ऊंची लपटें निकलने लगी, जिसने आसपास इलाके में बिछे केबल को चपेट में ले लिया। आग को बुझाने में दमकल कर्मियों को करीब एक घंटा लगा। वहीं चार घंटे तक उत्पादन ठप रहा। कोक ओवन के नेप्थलान प्लांट (टार डिस्टलेशन यूनिट) में भीषण आग लगने के बाद वहां फैले हुए बिजली के तारों के जाल में के चलते आग और विकराल रूप लेने लगी। हालांकि समय रहते वहां मौजूद कर्मचारी भाग निकले और कोई जनहानि नहीं हुई।

अग्निकांड के बाद यूनियनों ने प्रबंधन के खिलाफ खोला मोर्चा

बीएसपी के टार प्लांट में लगी आग के लिए कर्मचारी यूनियनों ने अफसरों और प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। तमाम यूनियनों का आरोप है कि अकुशल और ठेका श्रमिकों से कुशल तथा नियमित कर्मचारियों का काम असुरक्षित तरीके से लिया जा रहा है। इसी वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं। बीएमएस ने इस मामले में जीएम कोक ओवन को निलंबित करने की मांग की है। वहीं स्टील वर्कर्स यूनियन ने भी अफसरों को इसके लिए दोषी माना है।

दावा, मानवीय चूक से लगी है आग, जीएम को तत्काल सस्पेंड करने की मांग 

संस्था के अध्यक्ष नंद किशोर गुप्ता ने कहा कि मानवीय चूक से आग लगी है। इससे करोड़ों की आय देने वाली टार प्लांट जलकर राख हो गई। इसके लिए टार प्लांट में पदस्थ अधिकारी दोषी हैं। उन पर शीघ्र कार्रवाई की जाए और इस हादसे के लिए जीएम कोक ओवन को निलंबित करने की मांग की है। प्लांट में इतने बड़े पैमाने पर आग अचानक नहीं लग सकती। उप महासचिव सुबोध देशपांडेय ने कहा कि पूरा काम आउट सोर्सिंग में होने और टेक्निकल फाल्ट को नहीं पकड़ पाने के कारण यह हादसा हुआ है।

एंसिलरी: तत्काल बदले जाए कलपुर्जे

हादसे के बाद बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंदर खुराना ने कहा, बीएसपी के कलपुर्जे पुराने हो चुके हैं। प्लांट के पार्ट्स बदलने की आवश्यकता है। वही घटना की सूचना मिलने पर भिलाई श्रमिक सभा एचएमएस यूनियन का प्रतिनिधिमंडल तत्काल घटनास्थल पर पहुंचा। उन्होंने मामले की जांच के लिए प्रबंधन से मांग की है।

अधिकारियों समेत 14 की मौत हो गई थी

गत वर्ष 9 अक्टूबर 2018 को भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े हादसे में एक अधिकारी समेत 12 लोगों की मौके पर दो की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। हादसा उस वक्त हुआ जब क्षतिग्रस्त गैस पाइप लाइन का मेंटेनेंस किया जा रहा था। पाइपलाइन से गैस रिसने लगी। वेल्डिंग के दौरान निकली चिंगारी से धमाका हो गया। प्लांट में धुआं भर जाने की वजह से लापता कर्मचारियों को ढूंढने में मुश्किलें आईं। हादसे के वक्त प्लांट में 25 लोग मौजूद थे।

5 अप्रैल को ब्लास्ट फर्नेश में हुआ था जोरदार धमाका

ब्लास्ट फर्नेस में जोरदार धमाका हो गया। ब्लास्ट के बाद हॉट मेटल पास बने कंट्रोल रूम के कांच को तोड़ते हुए वहां बैठे कर्मचारियों पर छिटक गया।धमाका इतनी तेज था कि आसपास की जमीन हिल गई। यहां बैठे करीब 8 कर्मचारी झुलस गए। उन्हें तुरंत सेक्टर-9 अस्पताल में पहुंचाया गया था।

2014 में हुए हादसे में 6 लोगों की जान गई थी

भिलाई इस्पात संयंत्र में जून-2014 में जहरीली गैस के रिसाव से दो उप महाप्रबंधकों समेत छह लोगों की मौत हो गई थी और करीब 40 लोग घायल हो गए थे। अगस्त 2018 में भी स्टील प्लांट में हादसे हुए थे।

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