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छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में 10 से ज्यादा पंचायतें ऐसी जहां पंच और सरपंच का हुआ निर्विरोध चुनाव

रायगढ़ : छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतों में चुनाव की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में रायगढ़ जिले में कुछ ऐसे गांव भी हैं, जहां चुनाव से पहले ही सरपंच और पंच का चुनाव हो गया। इससे उन गांवों में अब चुनाव कराने की जरूरत नहीं होगी। खास बात यह है कि 10 से ज्यादा ऐसी पंचायतों में पंच और सरपंच को स्थानीय जनता ने निर्विरोध चुना है। ऐसे गांवों के विकास के लिए शासन विशेष पैकेज देगी।

फैक्ट फाइल 

  • चुनाव होंगे – 14344
  • र्निविरोध- 6168
  • र्निविरोध पंच-6131
  • र्निविरोध सरपंच-27
  • र्निविरोध बीडीसी-10
  • र्निविरोध डीडीसी-00

सरपंच निर्विरोध इसलिए पंचों को मनाया 

बरमकेला ब्लॉक के खिचरी में सरपंच निर्विरोध होने के बाद ग्रामीणों ने योग्य पंचों को खुद से चुनाव किया। सरपंच के लिए सिर्फ रूकमणि मनोहर पटेल ने ही नामांकन दाखिल किया, जबकि पंच के लिए हर वार्ड से 3 से 4 प्रत्याशी थे। अंतिम दिन ग्रामीणों ने एक राय होकर ग्राम सभा की और पंचों को चुनाव किया। आखिर में सर्व सम्मति से सभी ने 10 पंच तय कर लिए।

प्री-वोटिंग कर चुना सरपंच फिर भरवाया पर्चा

तमनार ब्लॉक के अराईमुड़ा में ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित नामांकन भरने के पहले प्री-वोटिंग कर सरपंच और पंचों का चुनाव कर लिया। अंतिम दिन सरपंच के लिए सन्यासी मांझी 10 पंचों के साथ नामांकन दाखिल किया। पिछले पंचायत चुनाव में यह गांव अस्तित्व में आया है। यहां कुल 687 मतदाता है, जिनके बीच आपसी सांमजस्य बेहतर होने के कारण यह संभव हो सका है।

सरपंच युवा और काम भी बेहतर इसलिए निर्विरोध 

खरसिया ब्लॉक के तेंदूमुड़ी ग्राम पंचायत में पढ़ा-लिखा युवा सरपंच है। पिछले पंचायत चुनाव में खेमराज राठिया चुनाव जीतकर सरपंच बने थे। जानकार युवा चेहरा होने की वजह से ग्रामीणों ने उन्हें अपना समर्थन दिया था। इसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत में बेहतर काम कराया। यही वजह है कि इस बार ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित कर सर्व सम्मति से अपना सरपंच चुना। साथ ही 10 नए चेहरों को पंच बनाया है। ऐसे में अब गांव में चुनाव कराने की जरूरत नहीं है और शासन से गांव को प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

मतदाता ने सर्वसम्मति से चुना सरपंच और पंच

पुसौर ब्लॉक झारमुड़ा ग्राम पंचायत में 788 मतदाता है। यहां पंच के लिए दो उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन आखिरी समय में एक ने नाम वापस ले लिया। तारिणी पटेल निर्विरोध सरपंच पद के लिए शेष रह गई। वहीं पंच के लिए 1 वार्ड में सिर्फ दो दावेदार थे, शेष 13 वार्डों के लिए एक-एक उम्मीदवार थे। आखिर में ग्रामीणों ने ग्राम सभा बुलाकर सर्व सम्मति से पंच और सरपंच चुना।

उम्मीदवारों ने ढाई-ढाई साल सरपंची का समझौता किया 

धरमजयगढ़ के दर्रीडीह में दो सरपंच के लिए सिर्फ दो प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। इन्होंने चुनाव लड़ने की बजाए ढाई-ढाई साल सरंपच बनने के समझौता के बाद नाम वापस ले लिया है। जोगिंदर एक्का और गुड्डू राम मांझी के इस आपसी समझौते पर स्थानीय निर्वाचन अधिकारी आरए कुरुवंशी का कहना है कि आयोग दोनों में से किसी एक को ही सरपंच नियुक्त करेगी।

तमनार ब्लॉक के अराईमुड़ा में ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित नामांकन भरने के पहले प्री-वोटिंग कर सरपंच और पंचों का चुनाव कर लिया। अंतिम दिन सरपंच के लिए सन्यासी मांझी 10 पंचों के साथ नामांकन दाखिल किया। पिछले पंचायत चुनाव में यह गांव अस्तित्व में आया है। यहां कुल 687 मतदाता है, जिनके बीच आपसी सांमजस्य बेहतर होने के कारण यह संभव हो सका है।

सरपंच युवा और काम भी बेहतर इसलिए निर्विरोध 

खरसिया ब्लॉक के तेंदूमुड़ी ग्राम पंचायत में पढ़ा-लिखा युवा सरपंच है। पिछले पंचायत चुनाव में खेमराज राठिया चुनाव जीतकर सरपंच बने थे। जानकार युवा चेहरा होने की वजह से ग्रामीणों ने उन्हें अपना समर्थन दिया था। इसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत में बेहतर काम कराया। यही वजह है कि इस बार ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित कर सर्व सम्मति से अपना सरपंच चुना। साथ ही 10 नए चेहरों को पंच बनाया है। ऐसे में अब गांव में चुनाव कराने की जरूरत नहीं है और शासन से गांव को प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

मतदाता ने सर्वसम्मति से चुना सरपंच और पंच

पुसौर ब्लॉक झारमुड़ा ग्राम पंचायत में 788 मतदाता है। यहां पंच के लिए दो उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन आखिरी समय में एक ने नाम वापस ले लिया। तारिणी पटेल निर्विरोध सरपंच पद के लिए शेष रह गई। वहीं पंच के लिए 1 वार्ड में सिर्फ दो दावेदार थे, शेष 13 वार्डों के लिए एक-एक उम्मीदवार थे। आखिर में ग्रामीणों ने ग्राम सभा बुलाकर सर्व सम्मति से पंच और सरपंच चुना।

उम्मीदवारों ने ढाई-ढाई साल सरपंची का समझौता किया 

धरमजयगढ़ के दर्रीडीह में दो सरपंच के लिए सिर्फ दो प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। इन्होंने चुनाव लड़ने की बजाए ढाई-ढाई साल सरंपच बनने के समझौता के बाद नाम वापस ले लिया है। जोगिंदर एक्का और गुड्डू राम मांझी के इस आपसी समझौते पर स्थानीय निर्वाचन अधिकारी आरए कुरुवंशी का कहना है कि आयोग दोनों में से किसी एक को ही सरपंच नियुक्त करेगी।

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