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नक्सली कनेक्शन: 3 महीने में 6 से ज्यादा छात्र पकड़ाए, इनमें 2 आश्रम में रहकर पढ़ने वाले भी

दंतेवाड़ा (एजेंसी) | नक्सली अपने कामों के लिए बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं इसके कई केस दंतेवाड़ा मंे सामने आ चुके हैं। बीते 3 महीने में 6 से ज्यादा छात्रों का नक्सली कनेक्शन पकड़ा गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें आवासीय संस्थाओं में रहने वाले बच्चे भी शामिल हैं।

कुआकोंडा पोटाकेबिन के छात्र को पकड़े जाने के बाद अब पुलिस ने ऐसे मामलों की जांच तेज़ कर दी है। बच्चे के पास से जब्त हुए मोबाइल को सायबर सेल में रखा गया है। अधीक्षक को भी नोटिस दी जाएगी। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने भास्कर को बताया कि ऐसे मामलों पर रोक लगाने ट्राइबल व शिक्षा विभाग को जरूरी निर्देश दिए हैं। बीईओ, बीआरसी, अधीक्षकों की भी बैठक ली जाएगी। एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने बताया कि नक्सली स्कूल में पढ़ने वाले व ड्रॉप आउट मासूम बच्चों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

मासूम बच्चों को अपने संगठन में शामिल कर रहे हैं। ऐसे मामलों पर अब सख्ती बरती जाएगी। नक्सलियों के लिए काम करने वाले संदेहियों की निगरानी पुलिस कर रही है। नक्सली संगठन में बच्चे पहले भी शामिल होते थे। लेकिन पुलिस पकड़ नहीं पाती थी। बताया जा रहा है पकड़े जाने के बाद कई बार परिजनों व बच्चों को समझाइश के बाद नाबालिग बच्चे छोड़ दिये जाते हैं, गम्भीर प्रकरण सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किए जाते हैं।

3 महीने के अंदर आए मामले, इनमें दो को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया, एक को पेश करने की तैयारी

कासोली में बस को आग के हवाले करने की घटना में शामिल करीब 19 साल की नक्सली पकड़ाई। कन्या आश्रम की छात्रा थी। इसी ने खुलासा किया था कि आश्रम , हॉस्टल के बच्चों को नक्सली हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। पढ़ते समय वह भी संगठन में शामिल हुई और पढ़ाई छोड़ दी।

फरवरी महीने में चिकपाल क्षेत्र में जवानों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से स्पाइक होल करते , आईईडी लगाते दो बच्चों को पकड़ा गया था। जिसमें एक बेंगलूर आश्रम के कक्षा 7वीं का जबकि एक इसी आश्रम का पूर्व छात्र था। सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश करने के बाद इन्हें समझाइश देकर छोड़ दिया गया। फरवरी में ही बारसूर थाना क्षेत्र में मुचनार के पास दो बच्चों को नक्सलियों के लिए काम करते पुलिस ने पकड़ा था। समझाइश देकर छोड़ दिया गया।

काउंसिलिंग में कोशिश करते हैं कि सुधार आ जाए

सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष बबिता पांडे ने बताया कि नक्सलियों के लिए काम करते पकड़े गए बच्चों के हाल ही में दो मामले सीडब्ल्यूसी के पास आए हैं। एक मामला बीजापुर जिले का था, जिसे वहां भेज दिया गया। जबकि दूसरा कटेकल्याण का था। बच्चे की काउंसिलिंग के बाद सुधार आया, बच्चे को परिजनों को सुपुर्द कर दिया। ऐसे मामले संवेदनशील होते हैं। एक्ट के मुताबिक ये देखा जाता है कि बच्चे ने कार्य को परिणित किया है या नहीं, यदि नहीं किया है तो काउंसलिंग कर सुधार की कोशिश करते हैं।

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