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आदिवासियों की जमीन अदला-बदली की प्रक्रिया को हरी झंडी

जगदलपुर (एजेंसी) | सलवा जुडूम के दौरान हिंसक वारदातों और घरों को जलाने की घटनाओं के बाद बस्तर छोड़ चुके आदिवासियों को जमीनी हक दिलाने के लिए चल रही लड़ाई के बीच दिल्ली से एक बड़ी खबर आई है। मंगलवार को पांच राज्यों, गृह मंत्रालय, ट्राइबल मिनिस्ट्री के अफसरों की एक बैठक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव लेने वाले थे।

इसके लिए सुबह 11 बजे का टाईम निर्धारित किया गया था, लेकिन एन वक्त पर गृह मंत्रालय के अफसरों ने किसी कारणवश बैठक में शामिल नहीं होने पाने की सूचना भिजवाई  तो बैठक को स्थगित करने प्लानिंग में काम शुरू हुआ लेकिन इस बीच छत्तीसगढ़ के अफसरों के अलावा सेंट्रल ट्राइबल मिनिस्ट्री के अफसर यहां पहुंच चुके थे।

ऐसे में बैठक को स्थगित नहीं किया गया और बैठक जारी रखी गई। बैठक में ट्राइबल मिनिस्ट्री के ज्वाइंट सेक्रेटरी केएस कोनर जो अभी एफआरए के विभाग प्रमुख भी हैं ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मांग पर कहा कि वन अधिकार कानून के तहत आदिवासी अपनी पैतृक जमीन के बदले दीगर राज्यों या फिर अपने ही राज्य में वन अधिकार पट्‌टे के तहत जमीन ले सकते हैं।

इस कानून के तहत मिले इस प्रावधान का उपयोग कहीं नहीं किया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए इस प्रावधान का उपयोग केंद्र की पहल पर करवाया जा सकता है और दीगर राज्यों से सीधे केंद्र सरकार के जरिए काम करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को राहत दिलाने के लिए हरसंभव पहल की जा रही है। आदिवासियों को जमीन के बदले जमीन देने के लिए सीधे केंद्र से निर्देश जारी करवाए जाएंगे।

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