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तमिलनाडु में बंधक बनाए गए 9 श्रमिक छुड़ाकर सकुशल घर वापस लाए गए

बलौदाबाजार (एजेंसी) | बलौदाबाजार तथा जांजगीर -चाम्पा जिले के तमिलनाडु में बंधक बनाए गए 9 मजदूरों को छुड़ाकर वापस ले लाया गया है। जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम ने इन मजदूरों को तमिलनाडु के नामाकल जिले में उनके कार्य-स्थल से छुड़वाकर आज सकुशल उनके घर-परिवार में पहुंचा दिया है। आपको बता दे पुरूषों को 12 हजार अैार महिलाओं को नौ हजार रूपये महीने के पगार सहित खाने-पीने और रहने-बसने के लिए मुफ्त में मकान देने का वायदा किया।

कुछ समय काम करने के बाद उनके आदमी परेशान करने लगे। उसके मैनेजर ने पैसे की रकम मांगने पर देने से मना कर दिया। तबीयत खराब होने पर भी इलाज नहीं करवाया गया। काम छोड़कर जाने की बात करते तो वह नाराज हो जाता। उनकी बातें भी हमें समझ में नहीं आती थी। बंधक की हालात में नारकीय जीवन जीने को वहां विवश थे।

9 लोगों को 8 महीने से बंधक बनाकर रखा गया था

उल्लेखनीय है कि बलौदाबाजार जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के गांव जोरा सहित जांजगीर-चाम्पा जिले भण्डोरा और छोटे अमलडीह के चार परिवारों के 9 लोग विगत 7-8 महीने से तमिलनाडु में बंधक के हालात में जीवन-यापन कर रहे थे। प्रशासनिक टीम ने एक सप्ताह की यात्रा के बाद इन मजदूरों को लेकर आज वापस आ गए और जोरा गांव में आवेदिका बहारतीन बाई के सुपुर्द इन्हें सौंप दिया गया है।

बिलाईगढ़ के नायब तहसीलदार अश्विनी चंद्रा के नेतृत्व में बंधक श्रमिकों को छुड़ाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा छह सदस्यीय टीम बनाई गई थी। टीम में श्रम कल्याण निरीक्षक संतोष कुर्रे, प्रधान आरक्षक सोहन रात्रे, आरक्षक कमलेश साहू और श्रवण टण्डन तथा बाल संरक्षण ईकाई के सामाजिक कार्यकर्ता श्री शाहनवाज शामिल थे।

नायब तहसीलदार चंद्रा ने इन मजदूरों के हवाले से बताया कि जोरा सहित भण्डोरा और छोटे अमलीडीह के 9 श्रमिक ज्यादा कमाई के फेर में विगत 6-7 महीने पहले बंगलौर गए थे। कुछ समय वे वहां ठीक-ठाक काम किए। इसके बाद वहां का काम खत्म हो गया। इस बीच बंगलौर रेलवे स्टेशन में ओमप्रकाश नाम का मजदूर दलाल उन्हें मिला। उसने बताया कि वह छत्तीसगढ़ का ही रहने वाला है। उसके परिचित का तमिलनाडु के सेलम और नामकल में कपड़ा फैक्ट्री और पानी पाऊच का कारखाना है।

श्रमिक नारकीय जीवन जीने पर मज़बूर किया गया

उन्हेांने पुरूषों को 12 हजार अैार महिलाओं को नौ हजार रूपये महीने के पगार सहित खाने-पीने और रहने-बसने के लिए मुफ्त में मकान देने का वायदा किया। कुछ समय काम करने के बाद उनके आदमी परेशान करने लगे। उसके मैनेजर ने पैसे की रकम मांगने पर देने से मना कर दिया। तबीयत खराब होने पर भी इलाज नहीं करवाया गया। काम छोड़कर जाने की बात करते तो वह नाराज हो जाता। उनकी बातें भी हमें समझ में नहीं आती थी। बंधक की हालात में नारकीय जीवन जीने को वहां विवश थे।

इस बीच परिवार जनों को किसी तरह सूचना दिए तब आई प्रशासनिक टीम की सहायता से हमें बंधन के हालात से मुक्ति मिली है। नायब तहसीलदार श्री चंद्रा ने अधिक कमाने के चक्कर में मजदूर दलालों के माया-जाल में नहीं फंसने की सलाह दी है। कोई दलाल यदि बाहर काम के लिए ले जाना चाहे तो सबसे पहले उसे श्रम विभाग का पंजीयन दिखाने को कहना चाहिए।

अन्यथा इस तरह की परेशानी से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिन श्रमिकों को टीम द्वारा छुड़ाकर सकुशल लाया गया है, उनमें भटगांव के ग्राम जोरा के श्री देवनारायण विश्वकर्मा और उनकी पत्नी श्रीमती उमाबाई, लखन सिदार और उनकी पत्नी द्रोपदी सिदार, भण्डोरा के छेदीलाल सिदार और उनकी पत्नी नर्मदा बाई और बहन सुकवार और छोटे अमलडीह के श्री दानी सिदार और उनकी मां दयामति शामिल हैं।

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