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अन्नपूर्णा दाल भात योजना हो सकती है बंद, केंद्र सरकार ने चावल देने से किया इनकार

रायपुर (एजेंसी) | राज्य में चलायी जा रही मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा दाल भात योजना 1 अप्रैल से बंद हो सकती है। इसकी वजह केंद्र से आने वाला चावल अब नहीं मिलेगा इसीलिए सरकार ने इन सेंटरों को चावल देने से मना कर दिया है। राजधानी समेत प्रदेशभर के दाल-भात केंद्रों को केंद्र सरकार के कोटे के चावल का ही आवंटन रियायती दर पर किया जाता था, जिसकी वजह से इन सेंटरों में लोगों को 10 रुपए में दाल-भात परोसा जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

खाद्य संचालनालय के डायरेक्टर अन्बलगन पी ने 27 मार्च को सभी जिलों के कलेक्टर और खाद्य नियंत्रकों को चिट्‌ठी लिखकर इस फैसले की जानकारी दी है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि 1 अप्रैल से किसी भी दाल-भात सेंटर को चावल का आवंटन नहीं किया जाएगा। सेंटरों चावल नहीं मिलने पर उनका खर्चा तीन गुना बढ़ जाएगा। इस वजह से सेंटर संचालकों ने इनके संचालन को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। जिला खाद्य विभाग ने अपने सभी दाल-भात सेंटर संचालकों को इसकी जानकारी दे दी है।

अचानक आए इस आदेश की खाद्य विभाग में दिनभर चर्चा होती रही। खाद्य संचालनालय के डायरेक्टर ने चिट्ठी में बताया है कि केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने नया आदेश जारी कर कहा है कि वित्तीय साल यानी 2019-20 में चावल का आवंटन केवल शासकीय एवं शासकीय स्वामित्व संस्थाओं को ही यानी जिनका संचालन सरकार या प्रशासन कर रहा है। इनके अलावा किसी भी संस्था को सब्सिडी दर में चावल का आवंटन नहीं किया जाएगा। राज्यभर में दाल-भात सेंटरों का संचालन सरकारी या सरकार के नियंत्रण वाली संस्थाओं में नहीं आता है। इस वजह से 1 अप्रैल 2019 से दाल-भात केंद्रों को चावल का आवंटन नहीं किया जाएगा।

करीब 12 हजार लोग खाते हैं खाना

छत्तीसगढ़ में 2004 में अन्नपूर्णा दाल-भाता योजना शुरू की कई थी। राजधानी में अभी 11 और राज्यभर में 128 दाल-भात सेंटर हैं। राज्य सरकार की ओर से इन दाल-भात केंद्रों को प्रोत्साहित करने के लिए निशुल्क गैस चूल्हे, प्रेशर कुकर के साथ 2 रुपए किलो चावल, 5 रुपए किलो चना तथा निशुल्क अमृत नमक दिया जाता है। छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग का दावा है कि इन सेंटरों में दिन 12 हजार से ज्यादा लोग खाना खाते हैं। इन सेंटरों में लोगों को 10 रुपए में दाल-भात परोसा जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

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