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छत्तीसगढ़ को धान खरीदने के लिए 1000 करोड़ का क़र्ज़ मंजूर

chhattisgarh farmer

रायपुर(एजेंसी) | छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) से एक हजार करोड़ का कर्ज फिर लिया है। 7.03 फीसद की ब्याज के साथ सरकार ने इस रकम को सात वर्ष में लौटाने का वादा किया है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में सरकार ने कर्ज नहीं लिया था, लेकिन दूसरी तिमाही शुरू होने के साथ ही सरकार फिर कर्ज की कतार में खड़ी हो गई है।

सरकार ने यह क़र्ज़ खजाने को मजबूत बनाये रखने के इरादे से लिया है। आने वाले दिनों में सरकार को धान खरीदना है। यह कर्ज इस वित्तीय वर्ष की पहली किश्त है। छत्तीसगढ़ सरकार इस साल 11,000 करोड़ तक का क़र्ज़ ले सकती है।

आरबीआई ने 14 अन्य राज्यों के लिए भी नीलामी की थी। लेकिन छत्तीसगढ़ को सबसे कम ब्याज पर क़र्ज़ दिया गया है। मंगलवार को छत्तीसगढ़ समेत 14 राज्यों ने कुल 14 हजार 953 करोड़ का कर्ज लिया है। इसमें बंगाल ने सर्वाधिक 25 सौ करोड़ 15 वर्ष के लिए उधार लिया है।

पुराने हिसाब में जाएगी कर्ज की यह रकम

वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार मंगलवार को ली गई कर्ज का उपयोग कर्जमाफी समेत पुराने हिसाब को बराबर करने में किया जाएगा। अफसरों ने बताया कि किसानों की कर्ज माफी की राशि अभी बैंकों को देना है। इस वजह से कर्ज मजबूरी हो गई थी। इसके साथ ही सरकार अपने कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का एरियर्स देने का भी मन बना रही है। इसके लिए भी फंड की जरूरत पड़ेगी।

अक्टूबर से पहले अभी और कर्ज लेगी सरकार

विभागीय अफसरों के अनुसार अक्टूबर से पहले राज्य सरकार अभी और कर्ज लेगी। इसकी एक वजह स्थानीय निकाय के चुनाव हैं। इस चुनाव से पहले सरकार विकास कार्यों को गति देना चाह रही है, इसके लिए फंड की जरूरत पड़ेगी। वहीं नवंबर से धान खरीद शुरू होनी है। इस बार भी सरकार 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदेगी, ऐसे में इसके लिए भी बड़ी राशि की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि केंद्र सरकार केवल 1750 स्र्पये प्रति क्विंटल के आसपास की घोषित समर्थन मूल्य का ही राज्य सरकार को भुगतान करेगी।

नौ महीने में 12 हजार से अधिक का कर्ज

नौ महीने यानी पिछले वर्ष दिसंबर से अब तक राज्य सरकार करीब 12 हजार करोड़ स्र्पये का कर्ज ले चुकी है। इसमें सरकार के विभिन्न् विभागों द्वारा लिया जाने वाला कर्ज शामिल नहीं है। सरकार ने बीते नौ महीने में जो कर्ज लिया है, उसमें सर्वाधिक 11 हजार 400 करोड़ स्र्पये आरबीआइ और 557 करोड़ राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से लिया है। वहीं, एबीडी बैंक से लगभग 217 करोड़ स्र्पये उधार लिया गया है।

सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक

इस बीच सरकार और उसका वित्त विभाग सरकार की आर्थिक स्थिति बेहतर होने का दावा कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि कर्ज लेना सामान्य प्रक्रिया है। इतना कर्ज लेने के बावजूद अभी राज्य की उधार लेने की लिमिट 16 हजार करोड़ से अधिक की है। इस चालू वित्तीय वर्ष में सरकार चाहे तो 16 हजार करोड़ तक कर्ज ले सकती है।

दिसंबर 2018 से अब तक का कर्ज

आरबीआई– 10400 करोड़

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक– 557.01 करोड़

एशियन डेवलपमेंट बैंक– 217.31 करोड़

कुल– 11174.32 करोड़

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