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सिम्स के बिजली स्विच बोर्ड में आग लगने से बच्चों के आईसीयू में भरा धुआं, 22 में से एक बच्चे की मौत

बिलासपुर (एजेंसी) | सिम्स के ग्राउंड फ्लोर पर बिजली के स्विच बोर्ड में मंगलवार सुबह 10:30 बजे शार्ट-सर्किट से आग लगने के कारण इसके ठीक ऊपर बने बच्चों के एनआईसीयू वार्ड सहित पूरे अस्पताल में धुआं भर गया। यहां से प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किए गए सात दिन के एक बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद सिम्स परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आग बुझाने की कोशिश में धुएं के कारण दो कर्मचारी भी बेहोश हो गए जिन्हें केजुअल्टी में भर्ती कराना पड़ा।

सिम्स में भर्ती अन्य नवजात बच्चों को जिला अस्पताल और प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल में शिफ्ट किए गए 9 नवजात बच्चों में से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए अपोलो रेफर करना पड़ा। बच्चाें को ट्रामा सेंटर की एम्बुलेंस से निजी अस्पताल तथा जिला अस्पताल भिजवाया गया। घटना की जांच के लिए डीन के निर्देश पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।




निजी अस्पताल में हो गई बच्ची की मौत

सिम्स के एनआईसीयू से भाटापारा निवासी तारिनी पठारे की सात दिन की बच्ची को निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था, उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके अलावा कुकड़ी गांव से आई शांति पति प्रकाश की बच्ची की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। बच्ची का इलाज कर रहे सीनियर पीडियाट्रिक्स डा. राकेश नरेला के अनुसार बच्ची का ब्रेन डेड हो चुका है और उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है।

महिला सुरक्षागार्ड बोली- धुएं के कारण कुछ नहीं दिखाई दे रहा था 

एक महिला सुरक्षाकर्मी ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक स्विच बोर्ड की वायरिंग में आग लगने के कारण पूरे अस्पताल में काला धुआं भर गया। इसके कारण किसी को कुछ नजर ही नहीं आ रहा था। उसने धुआं निकलते देख तुरंत इसकी जानकारी अस्पताल के अधीक्षक डा. भानुप्रताप सिंह को दी। अधीक्षक व अन्य कर्मी मौके पर पहुंचे और बिजली सप्लाई बंद कर अग्निशमन यंत्रों से आग पर काबू पाने की कोशिश की। लेकिन आग नहीं बुझी तो बड़े अग्निशमन यंत्र लाए गए जिनसे लगभग 20 मिनट में आग पर काबू पाया जा सका।

बच्चे को एनआईसीयू से निकलने के लिए आटोमेटिक लॉक सिस्टम नहीं खुला तो तोड़ना पड़ा कांच 

बिजली सप्लाई बंद कर देने से आटोमेटिक लॉक सिस्टम को खोला नहीं जा पा रहा था। इसलिए कर्मचारियों ने वार्ड से धुआं बाहर निकालने के लिए इसके कांच तोड़ दिए। कांच तोड़ते ही जिनके बच्चे भर्ती थे वे वार्ड में घुस गए और बच्चों को लेकर इधर-उधर भागने लगे। एनआईसीयू में 22 बच्चे भर्ती थे।

एंबुलेंस में नहीं थे प्रॉन्स, नोजल

बच्चों को शिफ्ट करने पहुंची सिम्स की एंबुलेंस तो उसमें भी पूरी व्यवस्था नहीं थी। उसमें प्राॅन्स नहीं था। इसे बाहर से लगाने में समय लगा। इसी तरह अपोलो के एंबुलेंस में नोजल नहीं था।

चादर सफाई करने वाले ही बिजली सुधारते हैं

जिला अस्पताल कर्मचारियों ने बताया कि यहां भी 3 दिन पहले शार्ट सर्किट हुआ था। यहां इलेक्ट्रीशियन नहीं है। जो चादर सफाई करते हैं, वे ही बिजली सुधारते हैं।



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